sachi bate status in hindi सच्ची बातें | Inspirational Hindi Stories

sachi bate status in hindi सच्ची बातें

“Once upon a time there was a little boy who had a very bad temper. His father decides to hand him a bag of nails and says that every time the boy loses his temper, he has to hammer a nail into the fence.

On the first day, the boy put 37 nails in that fence.

The boy gradually began to control his temper over the next few weeks and the number of nails that he had in the fence was gradually decreasing. He found that it was easier to control his temper than to hammer those nails into the fence.

[1]
sachi bate status in hindi
बुलंदियों को पाने की ख्वाहिश तो बहुत थी,
लेकिन दुसरो को रौदने का हुनर कहा से लाता।

[2]
हर रोज इतना मुस्कुराया करो की,
गम भी कहे यार मै गलती से आ गया क्या।

[3]
कुछ जख्म सदियों बाद भी ताजा रहते है,
वक्त के पास हर मर्ज की दवा नहीं होती।

[4]
कोशिश तो सब करते है लेकिन सब को हासिल ताज नहीं होता,
शोहरत तो कोई भी कमा ले लेकीन राजपूत वाला अंदाज नहीं होता।

[5]
रूह के रिश्ते की ये गहराइया तो देखिये,
चोट लगती है हमें और चिल्लाती है माँ,
चाहे हम खुशियों में माँ को भूल जाए दोस्तों,
जब मुसीबत सर पे आ जाए तो याद आती है माँ।

[6]
sachi bate status

कर्मो से ही पहचान होती है इंसानों की,
अच्छे कपडे तो बेजान पुतले को भी पहनाये जाते है।

[7]
जिंदगी में बार बार सहारा नहीं मिलता, 
बार बार आसानी से प्यार नहीं मिलता, 
जो पास है उसे संभाल कर रखो, 
खोने के बाद वह दुबारा नहीं मिलता।

[8]
जिस दिन तुम किसी दूसरे की बहेन की इज्जत के लिए लड़ोगे,
 बस उसी दिन तुम्हारी बहेन अपने आप सुरक्षित हो जाएगी।

[9]
अगर कसमे सच्ची होती तो सबसे पहले खुदा मरता।

[10]
जिंदगी जीने के लिए बनी थी,
मैंने इन्तजार में गुजार दी।

[11]
जब किसी को खोने की नोबत आती है,
तभी पाने की कीमत समझ आती है।

[12]
मेरा क्या हॉल है तेरे बिना कभी देख तो ले,
मै जी रहा हु तेरा भूला हुआ वादा बनकर।

[13]
जिंदगी नहीं रूकती किसी के चले जाने से,
लेकिन कुछ हद तक जीने का अंदाज बदल जाता है।

[14]
आज रोटी के पीछे भागता हु तो याद आता है,
मुझे रोटी खिलाने के लिए कभी माँ मेरे पीछे भागती थी।

[15]
जहाँ में  कुछ सवाल जिंदगी ने ऐसे भी  छोड़े है,
जिनका जवाब हमारे पास शिर्फ़ ख़ामोशी है।

[16]
कभी कभी अच्छे लोगो से भी गलतियाँ हो जाती हैं,
इसका मतलब ये नहीं वो बुरे है,
बल्कि इसका मतलब ये है की वो इंसान है।

[17]
मुश्किल कोई आ जाए तो डरने से क्या होगा 
जीने की तरकीब निकालो मरने से क्या होगा।

[18]
जो बच्चा छोड़ आता है माँ के दामन का चमन 
जिंदगी उसके लिए फिर वीरान रहती है। 

[19]
हक मिलता नहीं लिया जाता है,आजादी मिलती नहीं छीनी जाती है,
नमन उस देश प्रेमियो को जो देश की आजादी की जंग के लिए जाने जाते है!

[20]
मुकद्दर की लिखावट का एक एसा भी फायदा हो,
देर से किस्मत खुलने वालों का दुगना फायदा हो। 

[21]
भूख ने निचोड़ कर रख दिया है जिन्हे साहब 
कैसी गुजारी है रात ये ना पूछो तो अच्छा है।

[22]
हर रिश्ते मे विश्वाश रहने दो जुबान पर हर वक्त मिठास रहने दो। 
यहीं तो अंदाज है जिंदगी जीने का न खुद रहो उदास और न दूसरों को रहने दो।

[23]
छोटी छोटी खुशियाँ ही जीने का सहारा बनती है,
ख्वाहिशों का क्या है वह तो हर पल बदलती रहती है।

[24]
वो कहते है की पिया ना करो लिवर बिगड़ जाएगा,
उन नादानों को ये नहीं पता की ये बिगड़ी जिंदगी बना देती है।

[25]
इंसानों की इस दुनिया मे बस यही तो एक रोना है 
जज़्बात अपने हो तो जज़्बात और दूसरों के हो तो खिलौना है।

[26]
जरूरी नहीं की जिनमे साँसे नहीं वो ही मुर्दा है 
जिनमे इंसानियत नहीं है वो भी तो मुर्दा ही है।

[27]
जिंदगी इतनी भी मुश्किल तो नहीं होती 
आदमी इससे उलझ के उसे मुसकिल बहा देता है।

[28]
जीना है तो हसकर जीना सीख लो यारो 
मिलती नहीं रोशनी अपना दिल जलाने के लिए।

[29]
जिंदगी एक आईने की तरह है 
ये तभी मुस्कुराएगी जब आप मुस्कुराओगे। 

[30]
अजीब दशता है जिंदगी की जीत जाओ तो कई अपने छूट जाते है,
और हर जाओ तो अपने ही छोड़ जाते है।

[31]
जिंदगी वैसी नहीं है जैसी आप इसके लिए कामना करते है 
यह तो वैसी बन जाती है जैसा आप इसे बनाते है।

sachi bate status in hindi सच्ची बातें
1-कुछ ऐसा मत कहो जिससे आपको क्रोध से पछतावा हो

“एक बार एक छोटा लड़का था, जिसका स्वभाव बहुत खराब था। उनके पिता ने उन्हें नाखूनों का एक बैग सौंपने का फैसला किया और कहा कि हर बार जब लड़का अपना आपा खो देता है, तो उसे बाड़ में कील ठोकनी पड़ती है।

पहले दिन, लड़के ने उस बाड़ में 37 नाखून लगाए।

लड़का धीरे-धीरे अगले कुछ हफ्तों में अपने स्वभाव को नियंत्रित करने लगा और नाखूनों की संख्या जो कि वह थी, बाड़ में धीरे-धीरे कम हो रही थी। उन्होंने पाया कि बाड़ में उन नाखूनों को हथौड़ा देने की तुलना में अपने स्वभाव को नियंत्रित करना आसान था।

अंत में, वह दिन आ गया जब लड़का अपना आपा नहीं खोएगा। उसने अपने पिता को खबर सुनाई और पिता ने सुझाव दिया कि लड़के को अब हर दिन एक कील बाहर खींचनी चाहिए जो उसने अपने स्वभाव को नियंत्रण में रखा था।

दिन बीतते गए और वह युवा लड़का आखिरकार अपने पिता को बताने में सक्षम हो गया कि सभी नाखून चले गए थे। पिता अपने बेटे को हाथ में लेकर उसे बाड़े तक ले गया।

Well आपने अच्छा किया है, मेरे बेटे, लेकिन बाड़ के छेद को देखो। बाड़ कभी भी एक जैसी नहीं होगी। जब आप गुस्से में बातें कहते हैं, तो वे इस तरह से एक निशान छोड़ देते हैं। आप एक आदमी में चाकू डाल सकते हैं और इसे बाहर निकाल सकते हैं। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप कितनी बार कहते हैं कि मुझे खेद है, घाव अभी भी है। ''

2-क्षतिग्रस्त आत्माएं अभी भी लायक हैं
"एक दुकान के मालिक ने अपने दरवाजे के ऊपर एक संकेत रखा जिसमें कहा गया था: For पिल्ले फॉर सेल।"

इस तरह के संकेत हमेशा छोटे बच्चों को आकर्षित करने का एक तरीका है, और कोई आश्चर्य की बात नहीं है, एक लड़के ने संकेत देखा और मालिक से संपर्क किया; ’आप कितने पिल्लों को बेचने जा रहे हैं?’ उन्होंने पूछा।

दुकान के मालिक ने जवाब दिया, 'कहीं भी $ 30 से $ 50 तक।'

छोटे लड़के ने अपनी जेब से कुछ बदलाव निकाला। 2. मेरे पास $ 2.37 है, 'उन्होंने कहा। Look क्या मैं उन्हें देख सकता हूँ? '

दुकान का मालिक मुस्कुराया और सीटी बजी। केनेल में से लेडी आई, जो अपनी दुकान के गलियारे से नीचे भागती थी, उसके बाद पाँच नन्हे, फर के छोटे-छोटे गोले थे।

एक पिल्ला काफी पीछे चल रहा था। तुरंत छोटे लड़के ने लंगड़ा कर, पिल्ला को लंगड़ा कर कहा और कहा, 'उस छोटे कुत्ते का क्या कसूर है?'

दुकान के मालिक ने बताया कि पशुचिकित्सक ने छोटे पिल्ले की जांच की थी और उसे पता चला था कि उसके पास हिप सॉकेट नहीं है। यह हमेशा लंगड़ा रहेगा। यह हमेशा लंगड़ा रहेगा।

छोटा लड़का उत्साहित हो गया। Pupp यह वह पिल्ला है जिसे मैं खरीदना चाहता हूं। '

दुकान के मालिक ने कहा,, नहीं, आप उस छोटे कुत्ते को खरीदना नहीं चाहते हैं। यदि आप वास्तव में उसे चाहते हैं, तो मैं उसे आपको दे दूंगा। '

छोटा लड़का काफी परेशान हो गया। उसने अपनी उंगली की ओर इशारा करते हुए सीधे दुकान के मालिक की आँखों में देखा, और कहा;

मैं नहीं चाहता कि आप उसे मुझे दें। उस छोटे से कुत्ते की कीमत हर दूसरे कुत्ते के बराबर है और मैं पूरी कीमत चुकाऊंगा। वास्तव में, मैं आपको अब $ 2.37 दे दूंगा, और जब तक मैंने उसके लिए भुगतान नहीं किया है, तब तक 50 सेंट एक महीना।

दुकान के मालिक ने काउंटर किया, don आप वास्तव में इस छोटे कुत्ते को खरीदना नहीं चाहते हैं। वह कभी भी अन्य पिल्लों की तरह आपके साथ दौड़ने और कूदने और खेलने में सक्षम नहीं होगा। '

उनके आश्चर्य के लिए, छोटा लड़का नीचे पहुंच गया और एक बड़ी धातु की चूड़ी द्वारा समर्थित बाएं पैर को बुरी तरह से मुड़ने के लिए प्रकट करने के लिए अपने पैंट पैर को लुढ़का दिया। उसने दुकान के मालिक की तरफ देखा और धीरे से जवाब दिया, 'ठीक है, मैं खुद इतनी अच्छी तरह से नहीं चलता, और छोटे पिल्ला को किसी ऐसे व्यक्ति की आवश्यकता होगी जो समझता हो!' '

संगति का असर-
एक बार एक राजा शिकार के उद्देश्य से अपने काफिले के साथ किसी जंगल से गुजर रहा था. दूर-दूर तक शिकार नजर नहीं आ रहा था, वे धीरे धीरे घनघोर जंगल में प्रवेश करते गए. अभी कुछ ही दूर गए थे की उन्हें कुछ डाकुओं के छिपने की जगह दिखाई दी. जैसे ही वे उसके पास पहुचें कि पास के पेड़ पर बैठा तोता बोल पड़ा.
पकड़ो पकड़ो एक राजा आ रहा है इसके पास बहुत सारा सामान है लूटो लूटो जल्दी आओ जल्दी आओ.

तोते की आवाज सुनकर सभी डाकू राजा की और दौड़ पड़े. डाकुओ को अपनी और आते देख कर राजा और उसके सैनिक दौड़ कर भाग खड़े हुए. भागते-भागते कोसो दूर निकल गए. सामने एक बड़ा सा पेड़ दिखाई दिया. कुछ देर सुस्ताने के लिए उस पेड़ के पास चले गए , जैसे ही पेड़ के पास पहुचे कि उस पेड़ पर बैठा तोता बोल पड़ा  आओ राजन हमारे साधु महात्मा की कुटी में आपका स्वागत है. अन्दर आइये पानी पीजिये और विश्राम कर लीजिये.

तोते की इस बात को सुनकर राजा हैरत में पड़ गया , और सोचने लगा की एक ही जाति के दो प्राणियों का व्यवहार इतना अलग-अलग कैसे हो सकता है. राजा को कुछ समझ नहीं आ रहा था. वह तोते की बात मानकर अन्दर साधु की कुटिया की ओर चला गया, साधु महात्मा को प्रणाम कर उनके समीप बैठ गया और अपनी सारी कहानी सुनाई. और फिर धीरे से पूछा, “ऋषिवर इन दोनों तोतों के व्यवहार में आखिर इतना अंतर क्यों है.”

साधु महात्मा धैर्य से सारी बातें सुनी और बोले ,” ये कुछ नहीं राजन बस संगति का असर है. डाकुओं के साथ रहकर तोता भी डाकुओं की तरह व्यवहार करने लगा है और उनकी ही भाषा बोलने लगा है. अर्थात जो जिस वातावरण में रहता है वह वैसा ही बन जाता है कहने का तात्पर्य यह है कि मूर्ख भी विद्वानों के साथ रहकर विद्वान बन जाता है और अगर विद्वान भी मूर्खों के संगत में रहता है तो उसके अन्दर भी मूर्खता आ जाती है. इसिलिय हमें संगति सोच समझ कर करनी चाहिए.”

Post a Comment

0 Comments