sachi bate in hindi जिंदगी की कुछ सच्ची और अच्छी बाते | Inspirational Hindi Stories

sachi bate in hindi जिंदगी की कुछ सच्ची और अच्छी बाते!

A man found a cocoon of a butterfly. One day a small opening appeared. He sat and watched the butterfly for several hours as it struggled to force its body through that tiny hole.

until it suddenly stops making any progress and looks like it was stuck. So the man decided to help Butterfly. He took a pair of scissors and snipped off the remainder of the cocoon. The butterfly then emerged easily, although it had a swollen body and short, short wings.

[1]
sachi bate in hindi
कुछ तो बात है मेरे देश की मिट्टी में ग़ालिब, 
सरहदे तोड़ कर आते है आतंकी भी यहाँ दफ़न होने के लिए।

[2]
हो चुकी मुलाकात अभी सलाम बाकि है तुम्हारे नाम की दो घूंट शराब बाकि है,
 तुमको मुबारक हो खुशियों का शामयाना मेरे नसीब में अभी दो गज जमीन बाकि है।

[3]
उनसे कहना की किस्मत पे इतना नाज ना करे, 
हमने बारिश में भी जलते हुए माकन देखे है।

[4]
दौड़ने दो खुले मैदान में नन्हे कदमो को साहब, 
जिंदगी बहुत भागती है बचपन गुजर जाने के बाद

[5]
ख्वाहिशे मेरी अधूरी ही सही पर कोशिशे मै पूरी करता हु।

[6]
मैंने कुछ ऐसे भी गरीब देखे है,
 जिनके पास पैसे के सिवा और कुछ भी नहीं है।

[7]
sachi bate in hindi
खुबसूरत सा वो पल, था लेकिन वो कल था।

[8]
बेटा तब तक अपना है जब तक उसे पत्नी नहीं मिल जाती, 
बेटी तब तक अपनी है जब तक जिंदगी खत्म नहीं हो जाती है।

[9]
मिली थी जिंदगी किसी के काम आने के लिए,
 पर वक्त बीत रहा है कागज के टुकड़े कमाने के लिए।

[10]
मैने पूछा अपने खुदा से क्यों मेरी दुआ उसी वक्त नहीं सुनता,
 तो खुदा ने मुस्कुरा कर कहा, मै तो तेरे गुनाहों की सजा भी उसी वक्त नहीं देता।

[11]
जिंदगी को आसन नहीं खुद को मजबूत बनाना पड़ता है, 
उत्तम समय कभी नहीं आता समय को उत्तम बनाना पड़ता है।

[12]
उम्मीद झूटी ही सही, 
जिंदगी तो गुजरती है।

[13]
अब कटेगी जिंदगी सुकून से, 
अब हम भी मतलबी हो गए है।

[14]
दिल में बने रहना ही सच्ची शोहरत है, 
वरना मशहूर तो क़त्ल करके भी हुआ जा सकता है।

[15]
मुस्कुराहटे झूठी भी हुआ करती है, 
देखना नहीं समझना सिखों।

[16]
मेरे अपने कही कम न हो जाए इसीलिए हमने मुसीबत में 
भी किसी अपने को आजमाया नहीं।

[17]
जिंदगी जला दी हमने जब जैसी जलानी थी,
अब धुए पर तमाशा कैसा और राख पर बहस कैसी।

[18]
चलो अब जंगल को चलते है क्योकि सारे जानवर शहर मे रहते है।

[19]
गलत लोग सभी के जीवन मे आते है 
लेकिन सीख हमेशा सही ही देकर जाते है।

[20]
आत्मज्ञान, आत्मसम्मान और आत्मसंयम ये तीनों ही जीवन को 
परम सम्पन्न बनाते है।

[21]
ये जिंदगी तोड़कर हमको एसे बिखेरो इस बार,
ना फिर से टूट पाये हम और न फिर से जुड़ पाओ तुम।

[22]
जो दोगे वही लौटकर वापस आएगा चाहे वो इज्जत हो या धोखा।

[23]
हमे क्या पता था जिंदगी इतनी अनमोल है,
कफन ओढ़ कर देखा तो नफरत करने वाले भी रो रहे थे।

[24]
बहुत दूर है तुमसे पर दिल तुम्हारे पास है जिस्म पड़ा है यहाँ पर रूह तुम्हारे पास है,
जन्मदिन है तुम्हारा पर जश्न हमारे पास है,
जुड़ा है एक दूसरे से हम पर फिर भी तुम हमारे पास हो और हम तुम्हारे पास है।

[25]
जिंदगी एक सफर है आराम से चकते चलो,
उतार चढ़ाव तो आते रहेगे।

[26]
मुझसे नाराज है तो छोड़ दे मुझको ए जिंदगी,
मुझे रोज रोज तमाशा न बनाया कर।

[27]
जिनसे मिलते ही दिल को खुशी मिल जाती है,
वो लोग क्यो जिंदगी मे कम ही मिला करते है।

[28]
बुराई इसलिए नहीं बढ़ती क्यो की बुरे लोग बढ़ गए है,
बुराई इसलिए बढ़ती है की बुराई को सहन करने वाले लोग बढ़ गए है।

[29]
जिस जीवन कि समीक्षा व परख न कि गई हो,
 वह जीने योग्य ही नहीं है।

[30]
होने दो मेरी जिंदगी का तमाशा,
क्यो कि मैंने भी बहुत तालिया बजायी थी सर्कस मे, शेर के नाचने पर।

[31]
इंसान कि फितरत को समझते है ये परिंदे,
कितनी भी मुहब्बत से बुलाना मगर पास नहीं आएगे।

जिंदगी की कुछ सच्ची और अच्छी बाते

तितली (संघर्ष)
तितली (प्रेरणादायक लघु कथाएँ)
एक आदमी को तितली का एक कोकून मिला।

एक दिन एक छोटा सा उद्घाटन दिखाई दिया। वह बैठ गया और कई घंटों तक तितली को देखता रहा क्योंकि यह उस छोटे से छेद के माध्यम से अपने शरीर को मजबूर करने के लिए संघर्ष करता था।

जब तक यह अचानक कोई प्रगति करना बंद कर देता है और ऐसा लगता है कि यह अटक गया था।

तो उस आदमी ने तितली की मदद करने का फैसला किया। उन्होंने कैंची की एक जोड़ी ली और कोकून के शेष हिस्से को छीन लिया। तितली तब आसानी से उभरी, हालांकि इसमें एक सूजा हुआ शरीर और छोटे, छोटे पंख थे।

वह आदमी इसके बारे में कुछ भी नहीं सोचता था और तितली के समर्थन के लिए पंखों के विस्तार के लिए इंतजार कर रहा था। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। तितली अपने जीवन के बाकी हिस्सों को उड़ने में असमर्थ रही, छोटे पंखों और एक सूजे हुए शरीर के साथ रेंगती रही।

आदमी के दयालु हृदय के बावजूद, उसने यह नहीं समझा कि छोटे से उद्घाटन के माध्यम से खुद को प्राप्त करने के लिए कोकून और तितली द्वारा आवश्यक संघर्ष; तितली के शरीर से उसके पंखों में तरल पदार्थ निकालने के लिए भगवान का तरीका था। कोकून से बाहर निकलते ही खुद को उड़ने के लिए तैयार करना।

कहानी की शिक्षा:
जीवन में हमारे संघर्ष हमारी ताकत विकसित करते हैं। संघर्षों के बिना, हम कभी नहीं बढ़ते हैं और कभी मजबूत नहीं होते हैं, इसलिए हमारे लिए यह महत्वपूर्ण है कि हम अपने दम पर चुनौतियों का सामना करें, और दूसरों की मदद पर भरोसा न करें।

नैतिक मूल्यों पर हिंदी कहानी-
एक वृद्ध व्यक्ति अपने बहु – बेटे के यहाँ शहर रहने गया। उम्र के इस पड़ाव पर वह अत्यंत कमजोर हो चुका था, उसके हाथ कांपते थे और दिखाई भी कम देता था। वो एक छोटे से घर में रहते थे, पूरा परिवार और उसका चार वर्षीया पोता एक साथ डिनर टेबल पर खाना खाते थे। लेकिन वृद्ध होने के कारण उस व्यक्ति को खाने में बड़ी दिक्कत होती थी। कभी मटर के दाने उसकी चम्मच से निकल कर फर्श पे बिखर जाते तो कभी हाँथ से दूध छलक कर मेजपोश पर गिर जाता।

बहु -बेटे एक -दो दिन ये सब सहन करते रहे पर अब उन्हें अपने पिता की इस काम से चिढ होने लगी।

“हमें इनका कुछ करना पड़ेगा ”, लड़के ने कहा।

बहु ने भी हाँ में हाँ मिलाई और बोली, “आखिर कब तक हम इनकी वजह से अपने खाने का मजा किरकिरा करते रहेंगे, और हम इस तरह चीजों का नुक्सान होते हुए भी नहीं देख सकते।”

अगले दिन जब खाने का वक़्त हुआ तो बेटे ने एक पुरानी मेज को कमरे के कोने में लगा दिया, अब बूढ़े पिता को वहीँ अकेले बैठ कर अपना भोजन करना था। यहाँ तक कि उनके खाने के बर्तनों की जगह एक लकड़ी का कटोरा दे दिया गया था, ताकि अब और बर्तन ना टूट-फूट सकें।

बाकी लोग पहले की तरह ही आराम से बैठ कर खाते और जब कभी -कभार उस बुजुर्ग की तरफ देखते तो उनकी आँखों में आंसू दिखाई देते। यह देखकर भी बहु-बेटे का मन नहीं पिघलता,वो उनकी छोटी से छोटी गलती पर ढेरों बातें सुना देते। वहां बैठा बालक भी यह सब बड़े ध्यान से देखता रहता, और अपने में मस्त रहता।

एक रात खाने से पहले, उस छोटे बालक को उसके माता -पिता ने ज़मीन पर बैठ कर कुछ करते हुए देखा, “तुम क्या बना रहे हो ?” पिता ने पूछा,

बच्चे ने मासूमियत के साथ उत्तर दिया- अरे मैं तो आप लोगों के लिए एक लकड़ी का कटोरा बना रहा हूँ, ताकि जब मैं बड़ा हो जाऊं तो आप लोग इसमें खा सकें।

और वह पुनः अपने काम में लग गया। पर इस बात का उसके माता -पिता पर बहुत गहरा असर हुआ, उनके मुंह से एक भी शब्द नहीं निकला और आँखों से आंसू बहने लगे। वो दोनों बिना बोले ही समझ चुके थे कि अब उन्हें क्या करना है। उस रात वो अपने बूढ़े पिता को वापस डिनर टेबल पर ले आये, और फिर कभी उनके साथ अभद्र व्यवहार नहीं किया।

दोस्तों, हम अक्सर अपने बच्चों को नैतिक शिक्षा या moral values देने की बात करते हैं पर हम ये भूल जाते हैं की असल शिक्षा शब्दों में नहीं हमारे कर्म में छुपी होती है। अगर हम बच्चों को बस ये उपदेश देते रहे कि बड़ों का आदर करो…सबका सम्मान करो…और खुद इसके उलट व्यवहार करें तो बच्चा भी ऐसा ही करना सीखता है। इसलिए कभी भी अपने पेरेंट्स के साथ ऐसा व्यवहार ना करें कि कल को आपकी संतान भी आपके लिए लकड़ी का कटोरा तैयार करने लगे!

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