sacchi baatein जिंदगी की सच्ची बाते | Inspirational Hindi Stories

sacchi baatein जिंदगी की सच्ची बाते

Friends, everyone gets more than one opportunity in life, but many people lose them just because of their laziness. That's why I want to say that if you want to be successful, happy, lucky, wealthy or great, then by sacrificing laziness and procrastination, develop in yourself such qualities as discretion, painstaking labor, and constant awareness and whenever you have any thoughts in your mind. If the idea of ​​postponing the necessary work comes, then ask yourself a question - "Why not today?"

sacchi baatein
sacchi baatein 

''जिंदगी की सच्ची बाते''
[1]
बहुत देखा जीवन में समझदार बनकर पर,
 ख़ुशी हमेशा पागल बनने पर ही मिलती है !

[2]
लोग कहते है की वक़्त गुजर रहा है,
 पर वक्त कहता है की लोग गुजर रहे है।

[3]
जिंदगी में कभी किसी को बेकार मत समझण,
 क्योंकि बंद घड़ी भी दिन में दो बार सही समय दीखती है।

[4]
बाल सफेद करने में जिंदगी निकल जाती है 
काले तो आधे घंटे में हो जाते है !

[5]
हुनर तो सब में होता है बस फर्क सिर्फ इतना है,
 किसी का छिप जाता है किसी का छप जाता है !

[6]
कब मिल जाए किसी को मंजिल मालुम नहीं,
 इंसान के चेहरे पे उसका नसीब लिखा नहीं होता!

[7]
खुश किस्मत होते है वो शख्स 
जिसको किसी के दिल में पनाह मिलती है।

[8]
मंजिल मेरे कदमों से अभी दूर बहुत है, 
मगर तसल्ली ये है कि कदम मेरे साथ है।

[9]
रात भर चलती रहती है उँगलियाँ मोबाइल पर,
किताब सीने पे रखकर सोए हुए एक जमाना हो गया।

[10]
हजारो खुशबुए दुनिया की उस खुश्बू से छोटी है,
ज़ो भूखे को सामने पक रही रोटी से आती है।

[11]
खुदखुशी के लिए थोड़ा जहर काफी है 
मगर जिंदगी जीने के लिए काफी जहर पीना पड़ता है।

[12]
हमसफ़र कितना ही सच्चा और प्यारा क्यों न हो,
 घर से बिछड़ने का दुःख एक बेटी ही समझ सकती है।

[13]
झूट बोलते थे कितना फिर भी सच्चे थे हम,
 ये उन दिनों की बात है जब बच्चे थे हम।

[14]
खुदखुशी के लिए थोड़ा जहर काफी है 
मगर जिंदगी जीने के लिए काफी जहर पीना पड़ता है।

[15]
माँ बाप की दुआ की के आगे तो तकदीर भी लाचार हो जाती है।

[16]
उसके दुश्मन बहुत है!
 मतलब आदमी अच्छा ही होगा !!

[17]
कुछ इस तरह मैंने जिंदगी को आसान कर लिया, 
किसी से माफ़ी मांग ली तो किसी को माफ़ कर दिया।

[18]
वक्त सबको मिलता है जिंदगी बदलने के लिए, 
पर जिंदगी नहीं मिलती है वक़्त बदलने के लिये।

[19]
इज्जत इंसान की नहीं जरुरत की होती है, 
जरुरत ख़तम तो इज्जत ख़तम!

[20]
बस इतनी सी बात समंदर को खल गई 
एक कागज की नाव मुझ पे कैसे चल गई !

[21]
जिंदगी की हकीकत को बस इतना जाना है,
रोना अकेले ही है और हसने में साथ जमाना है !

[22]
लोग कहते है दुःख बुरा होता है जब भी आता है रुलाता है,
 हम कहते है दुःख अच्छा होता है जब भी आता है कुछ नया सीखा जाता है!

[23]
कौन कहता है मुसाफिर जख्मी नही होते रास्ते गवाह है 
कमबख्त गवाही नहीं देते।

[24]
हर ख्वाब के मुकद्दर में हकीकत नहीं होती!
 कुछ ख्वाब जिंदगी में महज ख्वाब ही रह जाते है !!

[25]
तजुर्बा इंसान को गलत फैसलों से बचाता है
लेकिन तजुर्बा भी गलत फैसलों से आता है !

[26]
ये दबदबा ये हुकूमत ये नशा और ये दौलत,
 सब किराये दार है घर बदलते रहते है।

[27]
कुछ लोग बहोत दूर रहकर भी दिलो के पास होते है !

[28]
ये साली जिंदगी भी दोस्तों की बीअर और 
गर्लफ्रेंड की टेडी बियर पर खर्च हुई जा रही है।

[29]
बड़ी इबादत से पूछा था मैंने खुदा से जन्नत का पता तो खुदा ने,
 अपनी गोद से उतारकर माँ की बाहों में सुला दिया।

[30]
इस दुनिया की सच्चाई यह है की यहाँ सुनता नहीं फ़रियाद कोई किसी की,
 यहाँ हसते  है लोग तभी जब होता है बर्बाद कोइ।

''sacchi baatein जिंदगी की सच्ची बाते''

[31]
मिट्टी भी जमा की और खिलौने भी बना के देखा पर जिंदगी 
कभी न मुस्कुराई फिर से बचपन की तरह !

[32]
असल में वही जीवन की चाल समझता है 
जो सफर की धुल को गुलाल समझता है।

[33]
कमा के इतनी दौलत भी मैं अपनी माँ को ना दे पाया कुछ भी,
 की जितने सिक्के से माँ मेरी नजर उतारकर फेंक दिया करती थी


हाथी रोप (विश्वास)

एक सज्जन एक हाथी शिविर के माध्यम से चल रहे थे, और उन्होंने देखा कि हाथियों को पिंजरों में नहीं रखा जा रहा है या जंजीरों के इस्तेमाल से रखा गया है।

जो सभी उन्हें शिविर से भागने से रोक रहे थे, वह उनके एक पैर में बंधी रस्सी का एक छोटा सा टुकड़ा था।

जैसा कि आदमी ने हाथियों पर ध्यान दिया, वह पूरी तरह से भ्रमित था कि हाथियों ने रस्सी को तोड़ने और शिविर से बचने के लिए अपनी ताकत का उपयोग क्यों नहीं किया। वे आसानी से ऐसा कर सकते थे, लेकिन इसके बजाय, उन्होंने बिल्कुल भी कोशिश नहीं की।

जिज्ञासु और जवाब जानने के लिए, उन्होंने पास के एक प्रशिक्षक से पूछा कि हाथी सिर्फ वहां क्यों खड़े थे और कभी भागने की कोशिश नहीं की।

ट्रेनर ने जवाब दिया-
"जब वे बहुत छोटे और बहुत छोटे होते हैं तो हम उन्हें बाँधने के लिए एक ही आकार की रस्सी का उपयोग करते हैं और उस उम्र में उन्हें पकड़ना काफी होता है। जैसे-जैसे वे बड़े होते हैं, उन्हें विश्वास होता है कि वे टूट नहीं सकते। उनका मानना ​​है कि रस्सी अभी भी उन्हें पकड़ सकती है, इसलिए वे कभी भी मुफ्त तोड़ने की कोशिश नहीं करते हैं। ”

हाथियों के मुक्त होने और शिविर से भागने का एकमात्र कारण यह था कि समय के साथ उन्होंने यह विश्वास अपनाया कि यह अभी संभव नहीं था।
हाथियों के मुक्त होने और शिविर से भागने का एकमात्र कारण यह था कि समय के साथ उन्होंने यह विश्वास अपनाया कि यह अभी संभव नहीं था।

कहानी की शिक्षा:
कोई फर्क नहीं पड़ता कि दुनिया आपको वापस पकड़ने की कितनी कोशिश करती है, हमेशा इस विश्वास के साथ जारी रखें कि आप क्या हासिल करना चाहते हैं। यह मानना ​​कि आप सफल हो सकते हैं वास्तव में इसे प्राप्त करना सबसे महत्वपूर्ण कदम है।

आज ही क्यों नहीं ?-
एक बार की बात है कि एक शिष्य अपने गुरु का बहुत आदर-सम्मान किया करता था |गुरु भी अपने इस शिष्य से बहुत स्नेह करते थे लेकिन  वह शिष्य अपने अध्ययन के प्रति आलसी और स्वभाव से दीर्घसूत्री था |सदा स्वाध्याय से दूर भागने की कोशिश  करता तथा आज के काम को कल के लिए छोड़ दिया करता था | अब गुरूजी कुछ चिंतित रहने लगे कि कहीं उनका यह शिष्य जीवन-संग्राम में पराजित न हो जाये|आलस्य में व्यक्ति को अकर्मण्य बनाने की पूरी सामर्थ्य होती है |ऐसा व्यक्ति बिना परिश्रम के ही फलोपभोग की कामना करता है| वह शीघ्र निर्णय नहीं ले सकता और यदि ले भी लेता है,तो उसे कार्यान्वित नहीं कर पाता| 

यहाँ तक कि  अपने पर्यावरण के प्रति  भी सजग नहीं रहता है और न भाग्य द्वारा प्रदत्त सुअवसरों का लाभ उठाने की कला में ही प्रवीण हो पता है | उन्होंने मन ही मन अपने शिष्य के कल्याण के लिए एक योजना बना ली |एक दिन एक काले पत्थर का एक टुकड़ा उसके हाथ में देते हुए गुरु जी ने कहा –‘मैं तुम्हें यह जादुई पत्थर का टुकड़ा, दो दिन के लिए दे कर, कहीं दूसरे गाँव जा रहा हूँ| जिस भी लोहे की वस्तु को तुम इससे स्पर्श करोगे, वह स्वर्ण में परिवर्तित हो जायेगी| पर याद रहे कि दूसरे दिन सूर्यास्त के पश्चात मैं इसे तुमसे वापस ले लूँगा|’

 शिष्य इस सुअवसर को पाकर बड़ा प्रसन्न हुआ लेकिन आलसी होने के कारण उसने अपना पहला दिन यह कल्पना करते-करते बिता दिया कि जब उसके पास बहुत सारा स्वर्ण होगा तब वह कितना प्रसन्न, सुखी,समृद्ध और संतुष्ट रहेगा, इतने नौकर-चाकर होंगे कि उसे पानी पीने के लिए भी नहीं उठाना पड़ेगा | फिर दूसरे दिन जब वह  प्रातःकाल जागा,उसे अच्छी तरह से स्मरण था कि आज स्वर्ण पाने का दूसरा और अंतिम दिन है |उसने मन में पक्का विचार किया कि आज वह गुरूजी द्वारा दिए गये काले पत्थर का लाभ ज़रूर उठाएगा | 

उसने निश्चय किया कि वो बाज़ार से लोहे के बड़े-बड़े सामान खरीद कर लायेगा और उन्हें स्वर्ण में परिवर्तित कर देगा. दिन बीतता गया, पर वह इसी सोच में बैठा रहा की अभी तो बहुत समय है, कभी भी बाज़ार जाकर सामान लेता आएगा. उसने सोचा कि अब तो  दोपहर का भोजन करने के पश्चात ही सामान लेने निकलूंगा.पर भोजन करने के बाद उसे विश्राम करने की आदत थी , और उसने बजाये उठ के मेहनत करने के थोड़ी देर आराम करना उचित समझा. पर आलस्य से परिपूर्ण उसका शरीर नीद की गहराइयों में खो गया, और जब वो उठा तो सूर्यास्त होने को था. 

अब वह जल्दी-जल्दी बाज़ार की तरफ भागने लगा, पर रास्ते में ही उसे गुरूजी मिल गए उनको देखते ही वह उनके चरणों पर गिरकर, उस जादुई पत्थर को एक दिन और अपने पास रखने के लिए याचना करने लगा लेकिन गुरूजी नहीं माने और उस शिष्य का धनी होने का सपना चूर-चूर हो गया | 

पर इस घटना की वजह से शिष्य को एक बहुत बड़ी सीख मिल गयी: उसे अपने आलस्य पर पछतावा होने लगा, वह समझ गया कि आलस्य उसके जीवन के लिए एक अभिशाप है और उसने प्रण किया कि अब वो कभी भी काम से जी नहीं चुराएगा और एक कर्मठ, सजग और सक्रिय व्यक्ति बन कर दिखायेगा.

 मित्रों, जीवन में हर किसी को एक से बढ़कर एक अवसर मिलते हैं , पर कई लोग इन्हें बस अपने आलस्य के कारण गवां देते हैं. इसलिए मैं यही कहना चाहती हूँ कि यदि आप सफल, सुखी, भाग्यशाली, धनी अथवा महान  बनना चाहते हैं तो आलस्य और दीर्घसूत्रता को त्यागकर, अपने अंदर विवेक, कष्टसाध्य श्रम,और सतत् जागरूकता जैसे गुणों को विकसित कीजिये और जब कभी आपके मन में किसी आवश्यक काम को टालने का विचार आये तो स्वयं से एक प्रश्न कीजिये – “आज ही क्यों नहीं ?”

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